Latest / The Horror Show by Karnik / Kaal Pustak - Mumbai Library Ki Haunted Kitab | Hindi Horror Stories
Transcript
- 0:00क्या सच में कोई आत्मा होती है जो हमें अपनी मौजूदगी का एहसास कराती
- 0:05है या ये सिर्फ एक डरावनी कहानियों होती है जो हमारी रातों
- 0:10की नींद छीन लेती है? आज रात मैं आपको ले जाऊंगा उस
- 0:14हौंटेड लाइब्रेरी के अंदर जिसका नाम था शांति विद्या भवन।
- 0:19जहाँ किताबों से ज्यादा आत्माओं के गहरे रहस्य थे और उन्हीं
- 0:23रहस्यों के बीच अभिनव को एक किताब मिलती है काल पुस्तक क्या आप
- 0:28तैयार हैं उस किताब के अंदर की कहानी सुनने के लिए डर की इस नई
- 0:35दुनिया में आपका स्वागत है। नमस्कार दोस्तों आप सुन रहे हैं
- 0:41दाहोर शो बाई कर्णिक कहानी शुरू करने से पहले अगर आप हमारे चैनल
- 0:46पर नए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर करले।
- 0:50आइए शुरू करते हैं आज की कहानी जिसका नाम है कालपुस्तक मुंबई के
- 0:56आउटस्कर्ट्स में एक छोटी सी। शहर से थोड़ी दूर पर एक अजनबी सी
- 1:01जगह थी जहाँ नए और पुराने जमाने की खुशबू एक स्ट्रेंज ब्लेंड में
- 1:07मिलती थी। गलियां छोटी थी लेकिन हर मोड़ और
- 1:10कार्नर में एक अलग कहानी छुपी हुई थी।
- 1:14हर गली के पीछे एक नए राज़, एक पुरानी कथा या एक अनजान किस्सा
- 1:20लोगों का इंतजार करता था। कभी एक पुराना इरानी कैफे तो कभी
- 1:26एक ग्रफीटी से भरी दीवार जो नए जमाने के आठ और पुराने शहर के
- 1:31रस्टिक चार्म को मिलाती थी। इसी शहर के एक रेंटेड वॅन बी एच
- 1:36के अपार्टमेंट में रहता था। अभिनव 30 साल का स्ट्रगलिंग राइटर
- 1:41जिसके सपने बड़े थे लेकिन उन तक पहुंचने का रास्ता हमेशा धुंधला
- 1:47लगता था। अभिनव फ्रीलैन्सिंग असाइनमेंट्स
- 1:50करके अपना गुज़ारा कर लेता था। लेकिन ये काम उसको कभी खुश नहीं
- 1:55कर पाता था। कभी लोकल करप्शन पे कोई स्टोरी
- 1:58लिखता तो कभी किसी छोटी। सेलिब्रिटी की सक्सेस स्टोरी पर
- 2:03ये स्टोरीज़ कभी उसे वो सक्सेस नहीं दिलवा पाई, जो उसका अल्टीमेट
- 2:07गोल था। हर बार जब किसी पब्लिशर को अपनी
- 2:10नई स्टोरी की कॉपी भेजता। तो या तो रिप्लाय नहीं आता या एक
- 2:15टिपिकल रिप्लाय आता थिस डोएसन्त मीट आवर एक्सपेक्टेशन्स।
- 2:20ये क्या है अभिनव, क्या बकवास भेजी है कम ऑन अभिनव?
- 2:27उसका कॉन्फिडेंस धीरे धीरे गिर रहा था, लेकिन।
- 2:31अंदर एक छोटी सी होप अब भी जिंदा थी।
- 2:34एक शाम फ्रस्ट्रेशन के बीच वो अपने फेवरिट चाय स्टाल पर गया।
- 2:39स्टाल की वो मिट्टी की खुशबू और कड़क मसाले की चाय का टेस्ट हमेशा
- 2:44उसका मूड थोड़ा बेटर कर देते थे। वहीं एक।
- 2:48प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठ के वो अपने फ़ोन पर नोटिफिकेशन स्क्रॉल
- 2:52कर रहा था जब उसका कॉलेज का पुराना दोस्त रोहित आ गया।
- 2:57रोहित एक वेल नोन लोकल हिस्टोरियन था जो शहर के दबे हुए फ़ैक्ट्स और
- 3:02परनार्मल स्टोरीज़ में इन्ट्रेस्ट रखता था।
- 3:05उसके आरटिकल्स कभी कभी वैरल हो जाते थे और उसका और अभिनव के लिए
- 3:10एक इंस्पिरेशन था। कॉन्वर्सेशन के बीच चाय की एक
- 3:15गर्म चुस्की लेते हुए रोहित कैज़ुअली बोला, अगर तुम्हें किसी
- 3:19नयी और ग्रिपिंग कहानी का ऐडिया चाहिए ना?
- 3:22एक लाइब्रेरी है टाउन के एंड में। जहाँ से बस एक किताब ले आओ लोग
- 3:27कहते हैं वो किताब लिखने वाले के अंदर एक अजीब क्रियेटिविटी जानती
- 3:32है। अभिनव पहले तो हँसा, सोचते हुए कि
- 3:36रोहित अपने यूसुअल ड्रामेटिक टोन में है, लेकिन फिर क्यूरियोसिटी
- 3:41का एक छोटा सा बीज उसके अंदर बोया गया।
- 3:45एक स्ट्रगलिंग रैटर के लिए ऐसी कोई चीज़ जो उसकी स्टोरीज़ को
- 3:49इम्पैक्ट और यूनिकनेस दे सके, वो किसी प्रेशर से कम नहीं लग रही
- 3:53थी। रोहित ने लोकेशन एक्सप्लेन की एक
- 3:57अबन्दोनेड लाइब्रेरी जिसका नाम था शांति विद्या भवन लाइब्रेरी
- 4:02पुरानी ब्रिटिश एरा की थी। और लोग कहते थे की ये एक डेड ज़ोन
- 4:07जैसी है, ना कोई वहाँ रहता है ना कोई वहाँ जाता है।
- 4:12बस एक ओल्ड केयर टेकर लाइब्रेरी को संभालना था।
- 4:17क्यूरियोसिटी में अभिनव अगले दिन लाइब्रेरी पहुंचा।
- 4:20वहाँ एंटर करते ही एक अजीब सी ठंड थी।
- 4:23जो मुंबई की गर्मी में इम्पॉसिबल लगती थी।
- 4:26अंदर हर जगह पुरानी किताबें और वुडेन शेल्स थे, जिसमें दीमक ने
- 4:31समय के साथ वहाँ अपना घर बना लिया था।
- 4:34छत से लटकते मकड़ी के जाले और मट्टी की पुरानी खुशबू माहौल को
- 4:40और भी ज्यादा खौफनाक बना रही थी। केयरटेकर एक बेहद शांत, सफेद
- 4:46दाढ़ी और शांत किस्म का इंसान था वो केयरटेकर कम एक साया ज्यादा लग
- 4:52रहा था। वो धीरे से अभिनव की तरफ आया और
- 4:56बस उसने एक लाइन बोली यहाँ से जो भी ले जाओगे, समझदारी से ले जाना।
- 5:03अभिनव की नजर एक बुकशेल्फ के कोने में रखी एक किताब पर गई।
- 5:09काले चमड़े का कवर और उसके ऊपर धुंधले अक्षरों में उस किताब का
- 5:13नाम लिखा हुआ था काल पुस्तक। जैसे ही उसने किताब उठाई,
- 5:19केयरटेकर के चेहरे का एक्सप्रेशन। बदलने लगे।
- 5:23उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी पर उसने कुछ नहीं कहा।
- 5:28बस एक थके हुए इंसान की तरह अपना सर हिलाकर लाइब्रेरी के अंदर की
- 5:33तरफ चला गया। अभिनव को लाइब्रेरी से बाहर आते
- 5:37ही कुछ अजीब सा फील हुआ। जैसे उसने कुछ ऐसा उठा लिया हो जो
- 5:42उसका नहीं था। उसके मन में एक हल्का सा रिग्रेट
- 5:46भी था। लेकिन एक्साइटमेंट उस रिग्रेट पर
- 5:49भारी पड़ चुकी थी। उसे लग रहा था कि ये किताब उसकी
- 5:53जिंदगी बदलने वाली है। उसे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था।
- 5:58ये किताब। सिर्फ उसकी जिंदगी नहीं और भी
- 6:01बहुत कुछ बदलने वाली है। घर आकर अभिनव ने काल पुस्तक को
- 6:07बड़े आराम से खोला। किताब के पन्ने खाली थे और उनका
- 6:11टेक्सचर जैसे हैंडमेड पेपर का था। उसने कैज़ुअली एक पेन उठाया और
- 6:17लिखने की कोशिश की। लेकिन जैसे ही उसने अपने पैन का
- 6:21नीब पेपर पर रखा, उसका हाथ अपने आप चलने लगा।
- 6:26उसने एक लाइन लिखी रास्ता गलत चुना तो लौटने का चांस नहीं
- 6:33मिलेगा। अभिनव का दिल एक सेकंड के लिए ढक
- 6:37से रह गया। उसका मन डर और एक्साइटमेंट के बीच
- 6:42घूम रहा था, लेकिन फिर उसने सोचा शायद मेरे सब कॉन्शॅस ने ये लिख
- 6:48दिया होगा। उसने एक बार फिर ट्राई किया और इस
- 6:51बार सब नॉर्मल लगने लगा। उसने सोचा कि ये सिर्फ इमेजिनेशन
- 6:56का खेल है। और अपनी कहानी लिखना शुरू किया।
- 7:01अगली कुछ रातों तक जब भी अभिनव उस किताब को खोलता, एक अजीब सी शक्ति
- 7:06उसके अंदर भर जाती। जो आइडियास उसके मैएंड में पहले
- 7:10बिखरे और धुंधले लगते थे वो एकदम से क्रिस्टल क्लियर होने लगे।
- 7:15उसके प्लॉट्स इतने शर्प और इंगेजिंग हो गए थे की वो खुद
- 7:19हैरान था। हर वर्ड में एक जादू था और हर
- 7:23पैराग्राफ में एक अलग ही इम्पैक्ट उसके लिखने का स्टाइल बदलने लगा
- 7:28था। अब उसके करैक्टर्स और ज्यादा रियल
- 7:32और डायलॉग्स। रोंगटे खड़े करने वाले लगते थे।
- 7:35ऐसा लगता था जैसे वो सिर्फ लिख नहीं रहा बल्कि उस पल को जीकर
- 7:41अपना एक्सपीरियंस बयां कर रहा है जैसे कोई काली शक्ति उसके साथ काम
- 7:47कर रही हो। 1 दिन उसने अपनी नई
- 7:50इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी कंप्लीट की।
- 7:52जो एक करप्शन स्कैंडल के अराउंड थी, उसने वो मैनस्क्रिप्ट एक
- 7:57रेपुडटेड पब्लिशर को भेजी और बस एक हफ्ते के अंदर उसका पॉज़िटिव
- 8:02रिस्पांस आया। पब्लिशर इतना इम्प्रेस्ड था कि
- 8:06उन्होंने ना सिर्फ स्टोरी पब्लिश की बल्कि उसे प्रोमोट भी किया।
- 8:12आर्टिकल वायरल हो गया और एक ही महीने के अंदर अभिनव का नाम एक
- 8:17क्रेडिबल राइटर के तौर पर सब जगह छा गया।
- 8:20अभिनव के लिए ये एक सपने के सच होने जैसा था।
- 8:23जो स्ट्रगल और रिजेक्शन पहले उसका साथ नहीं छोड़ते थे, उसने जैसे
- 8:29अचानक से पीछा ही छोड़ दिया था। लेकिन उस पे खुशी के 771 अजीब सी
- 8:35बात भी थी। उसका दिमाग अब लिखने के लिए एक
- 8:39अलग ही लेवल के प्रेशर को महसूस करने लगा था।
- 8:43क्या ये किताब की वजह से था या फिर ये सक्सेस की वजह से था?
- 8:48ये सवाल उसके दिमाग के कोने में रुका हुआ था लेकिन वो कॉन्सियस्ली
- 8:55इग्नोर कर रहा था। उसे पता नहीं था कि ये किताब
- 8:59सिर्फ उसकी सक्सेस का जरिया नहीं बल्कि उसकी जिंदगी में कुछ ऐसा कर
- 9:04चुकी थी जो उसे कभी भी। नॉर्मल नहीं रहने देगा।
- 9:09लेकिन सक्सेस के साथ कुछ और भी शुरू हो गया था।
- 9:14हर बार जब अभिनव किताब यूज़ करता, एक अजीब सी आहट होती जैसे कोई उसे
- 9:22देख रहा हो, कभी उसे लगता कि किताब के खाली पन्नों के नीचे।
- 9:27अधूरी लकीरें दिख रही हैं। जैसे किसी और की बनाए हुए चित्र
- 9:33जो अब मिट चूके हों। पर जब वो ध्यान से देखता तो पन्ने
- 9:37बिल्कुल सफेद और खाली नजर आते। एक रात जब वो किताब में अपनी नई
- 9:43स्टोरी लिख रहा था। उसने अपने लैपटॉप की स्क्रीन के
- 9:47रिफ्लेक्शन में कुछ अजनबी देखा। एक चेहरा जो उसके पीछे खड़ा था,
- 9:54उसका मन एक सेकंड के लिए रुक गया। उसने तुरंत पलट के देखा पर रूम
- 10:01बिल्कुल खाली था। एक ख़ामोशी थी जो और ज्यादा बढ़ती
- 10:06जा रही थी। वो अपने आप को ये समझाकर बेड पर
- 10:11लेट गया कि बस उसकी इमेजिनेशन का खेल है लेकिन उस रात उसका सपना एक
- 10:18हकीकत की तरह है। सपने में उसने अपने कमरे के कोने
- 10:23में एक औरत को देखा, वो चुपचाप खड़ी थी।
- 10:27एक स्ट्रेंज रिएक्शन के साथ उसका चेहरा पूरा गंदा था।
- 10:32जैसे वो एक परछाई में छुपा हुआ हो, लेकिन उसके हाथ में वही किताब
- 10:38थी। कॉल पुस्तक।
- 10:41औरत का वह होना अभिनव के लिए एक नई चिंता लेकर आया।
- 10:45उसने बस एक लाइन बोली जो एक ठंडी खुशबुसाहत जैसी लग रही थी।
- 10:51सपना इतना रियल था कि अभिनव शौक के मारे पैड से गिर गया और ज़ोर
- 10:58ज़ोर से साँसे लेने लगा। उसका पूरा रूम एक अजीब भारीपन से
- 11:03भरा हुआ था। उसने सोचा, शायद ये बस एक पुराना
- 11:07सपना है जो स्ट्रेस और ओवर थिंकिंग की वजह से आया होगा।
- 11:13लेकिन उसके दिल के कोने में एक डर अप पैदा हो चुका था।
- 11:17जो उसे कंटिन्यूस्ली ये फील करवा रहा था की ये कोई आम सपना नहीं
- 11:23था। उसका मन नहीं मान रहा था, पर उसने
- 11:26एक बार फिर किताब उठाकर देखा। इस बार उसे एक और अजीब बात महसूस
- 11:32हुई। पन्ने काफी भारी लग रहे थे जैसे
- 11:36उनमें कुछ। छुपा हो।
- 11:38जब उसने पेजेज़ को नजदीक से देखा तो उसे उनमें उस औरत का चेहरा नजर
- 11:45आया। अभिनव का अपनी क्यूरियोसिटी के
- 11:48चक्कर में किताब को एक्सप्लोर करना अब उसी पे भारी पड़ने लगा
- 11:53था। लेकिन एक बात जो अब साफ हो चुकी
- 11:57थी, जो सपना उसने देखा था वो सपना नहीं एक हकीकत थी।
- 12:03अगली सुबह अभिनव सीधा रोहित के पास गया और सब कुछ बताया।
- 12:08रोहित इनीशियली हंसा, लेकिन जब उसने किताब देखी उसका चेहरा।
- 12:13सीरियस हो गया। उसने बताया कि एक वक्त पे एक
- 12:17राइटर उस लाइब्रेरी से ये किताब ले गया था।
- 12:20उस राइटर का नाम गिरीश खन्ना था और वो अपने आरटिकल्स के लिए काफी
- 12:26फेमस था। लेकिन कुछ महीने बाद गिरीश की डेथ
- 12:30अनएक्सप्लेन्ड सरकमतरंसेस में हो गई थी।
- 12:33रोहित ने अभिनव को वार्न किया कि वो उस किताब को वापस लाइब्रेरी
- 12:38में रखते, लेकिन अभिनव ने सक्सेस की भूख में रोहित की बात को
- 12:42इग्नोर कर दिया। उसका बिलीव था की जो भी कुछ हो
- 12:46रहा है वो बस हार्ड वर्क और इमेजिनेशन का रिसाल्ट है।
- 12:51और किताब एक मीडियम से ज्यादा कुछ नहीं है।
- 12:55लेकिन उस कॉन्वर्सेशन के बाद से अभिनव के दिमाग में गिरीश खन्ना
- 13:01का नाम बार बार घूमने लगा। उसने अपने लैपटॉप पर सर्च किया और
- 13:06गिरीश के पुराने आरटिकल्स और न्यूस रिपोर्ट खंगालने लगा।
- 13:11उसके सारे आरटिकल्स आउटस्टैंडिंग थे।
- 13:14एकदम यूनिक और पावरफुल। लेकिन एक चीज़ और चौंकाने वाली
- 13:19थी। गिरीश के लास्ट आर्टिकल के बारे
- 13:23में कोई ट्रेस नहीं था। रिपोर्ट्स के हिसाब से उसका लास्ट
- 13:27आर्टिकल पब्लिश होने के कुछ दिन पहले ही उसकी।
- 13:31मौत हो गयी थी। जो चीज़ और ज्यादा डिस्टर्बिंग
- 13:34थी। वो ये थी कि गिरीश के दोस्त और
- 13:38कॉलीग्स के अकाउंट्स के हिसाब से उसने अपने एंड डेज़ में बार बार
- 13:43एक ही किताब का जिक्र किया था। वो थी कॉल पुस्तक जो उसके करियर
- 13:49का। टर्निंग पॉइंट थी।
- 13:52ये सब देखने के बाद भी अभिनव का मन उस किताब से दूर नहीं जा रहा
- 13:58था। उसका लॉजिक और एम्बिशन एक दूसरे
- 14:01से टकरा रहे थे। और वो अपनी सक्सेस के ऐडिक्शन के
- 14:05चक्कर में इन वार्निंग्स को इग्नोर करते हुए और आगे बढ़ता जा
- 14:10रहा था लेकिन उसे ये नहीं पता था कि ये किताब अब उसकी जिंदगी का
- 14:16हिस्सा बन चुकी है और इसके साथ ही एक राज़ है जो उसे बहुत महंगा।
- 14:22पढ़ने वाला है। अभिनव ने डिसाइड किया कि वो अपनी
- 14:25अगली कहानी उस जगह से इंस्पायर्ड रखेगा जो उसका अब तक का सबसे बड़ा
- 14:31सोर्स बन चुकी थी। आप समझ ही चूके होंगे वो जगह कौन
- 14:36सी थी? शांति विद्या भवन।
- 14:39उसने लाइब्रेरी के केयरटेकर और उस जगह के अंदर छुपे राज़ को फोकस
- 14:44करते हुए अपने पहले ड्राफ्ट की शुरुआत की।
- 14:47वो दिन रात किताब लिखने लगा और एक एक पेज उसकी इमेजिनेशन और
- 14:53क्रियेटिविटी से भर गया पर जब भी वो कुछ लिखता वो हाथ से उसके
- 14:58आसपास। होने लगते।
- 15:001 दिन उसने ऐसे ही एक सीन लिखा जहाँ एक टूटी घड़ी लाइब्रेरी के
- 15:05कोने में टिक टिक कर रही थी। अगली रात उसके घर की एक पुरानी
- 15:10घड़ी जो कभी चलती नहीं थी, अचानक से वैसे ही टिक टिक करने लगी।
- 15:17एक और बार उसने एक और सीन लिखा जहाँ पुराना केयरटेकर एक अंधेरे
- 15:22रूम में एक छुपी हुई शेल्फ के पीछे कुछ ढूंढ रहा था।
- 15:27अगली सुबह लाइब्रेरी के केयरटेकर का नाम एक न्यूस आर्टिकल में आया।
- 15:32जिसमें बताया गया कि उसकी लाश उसी के घर के पास जो लाइब्रेरी है
- 15:38वहाँ से पुरानी सेल्फ के पीछे दबी हुई मिली अभिनव का दिमाग और
- 15:44ज्यादा क्वेश्चन्स से भर गया था। उसने डिसाइड किया कि कहानी के
- 15:48आंसर्स उस लाइब्रेरी के अंदर ही छुपे हैं।
- 15:52और उसे एक बार फिर वहाँ जाना होगा।
- 15:55वो रात अब तक की सबसे सन्नाटे भरी रात थी।
- 15:59लाइब्रेरी के अंदर अंधेरा एकदम गहरा था और डर मानो हर कदम के साथ
- 16:06बढ़ रहा था। जैसे ही उसने अपने फ्लैशलाइट की
- 16:09रौशनी से अंदर देखा। उसे सांसों की आवाज सुनाई दी जैसे
- 16:14कोई बहुत पास और उसके आसपास घूम रहा हो।
- 16:18एक पुराने कागजों से भरा शेल्फ एकदम से उसकी ओर गिर पड़ा और एक
- 16:23धूल में लिपटी किताब उसके सामने आई।
- 16:27अभिनव खुद को प्रूव करने की जिद में और आगे बढ़ता गया।
- 16:31लेकिन जैसे ही वो उस पुरानी किताब को खोलता है, लाइब्रेरी का दरवाजा
- 16:37एकदम ज़ोर से बैंग करके बंद हो जाता।
- 16:42अभिनव को एहसास हुआ कि ये सिर्फ एक लाइब्रेरी नहीं।
- 16:46ये एक ऐसे राज़ का हिस्सा है जो जिंदा और मुर्दा के बीच एक ब्रिज
- 16:52क्रिएट कर रही थी। उसे लगा कि वो यहाँ से निकल
- 16:56जाएगा, लेकिन सच ये था कि लाइब्रेरी ने उसे अपने जाल में
- 17:02उलझा लिया था। क्या वो सिर्फ?
- 17:04क्रियोसिटी का शिकार था या उसकी किस्मत उसे यहाँ ले आई थी, ये
- 17:10सवाल हमेशा के लिए उस लाइब्रेरी के अंधेरों में खो गया।
- 17:16अगली सुबह अभिनव का कमरा खुला मिला लेकिन वो खुद वहाँ नहीं था।
- 17:22उसका फ़ोन, लैपटॉप और लिखने की सारी चीजें अपनी जगह पर थी जैसे
- 17:29वो बस एक पल के लिए उठा हो और फिर कभी वापस ही नहीं लौटा।
- 17:34पुलिस इन्वेस्टिगेशन में कोई अनयूज़ुअल क्लू नहीं मिला।
- 17:38बस एक किताब कॉल पुस्तक। जो एक सेल्फ पर रखी हुई थी
- 17:44बिल्कुल साफ, खाली और अन्टूच्ड। उसकी डायरी के कुछ पन्नों पर बस
- 17:51कुछ लाइनें लिखी हुई थी। जो सच के करीब जाता है, वो कई बार
- 17:57उस सच में खुद उलझ जाता है। शांति विद्या भवन लाइब्रेरी की
- 18:02कहानी अब और भी ज्यादा मशहूर हो चुकी थी लेकिन अब कोई भी वहाँ
- 18:08जाने की हिम्मत नहीं करता। लाइब्रेरी का केयर टेकर अब गुजर
- 18:13चुका था। अगर आज भी उस लाइब्रेरी के बारे
- 18:16में वहाँ के लोगों से कोई कुछ पूछता है?
- 18:19तो वहाँ के लोग बस एक हल्की सी मुस्कान के साथ एक ही बात कहते
- 18:24हैं। हर किताब एक कहानी को अपने अंदर
- 18:28समेट लेती है। क्या आपको भी उस किताब का हिस्सा
- 18:32बनना है? ये काल पुस्तक सिर्फ एक किताब
- 18:36नहीं थी ये एक। खोई हुई सच्चाई थी एक डार्क
- 18:41सीक्रेट जो अभिनव इस दुनिया में ले आया था।
- 18:45हर रात उस किताब के साथ जो स्ट्रेंज इन्सिडेंट्स हुए, वो
- 18:50सिर्फ इमेजिनेशन की क्रियेशन नहीं थे।
- 18:53एक राइटर जो खुद को अपनी कहानियों में खो चुका था।
- 18:57शांति विद्या भवन के अंदर जो भी कुछ हुआ वो सिर्फ एक डरावनी कहानी
- 19:03नहीं थी बल्कि एक जिंदगी बदल देने वाला हादसा था।
- 19:08आज मुझे ये समझ आया की कभी कभी जो आपको बाहर दिखाई नहीं देता वो ही
- 19:14सबसे ज्यादा इम्पैक्टफुल होता है। अब शायद मुझे भी अपनी डायरी लिखने
- 19:20में डर लग सकता है क्योंकि काल पुस्तक कब किसकी डायरी बन जाए ये
- 19:26किसी को नहीं पता। अगर आप भी लिखने का शौक रखते हैं
- 19:30तो संभल के आपकी कलम चलते चलते कहीं आत्माओं तक ना पहुँच जाए।
- 19:36क्योंकि अक्सर आत्माएं अधूरी कहानियों को पूरा करने की तलाश
- 19:40में यहाँ वहाँ भटकती रहती हैं। अपने आंख कान खुले रखें और इस
- 19:46कड़क की ठंड में हमारी हॉरर स्टोरीज़ को अपना प्यार ऐसे ही
- 19:50देते रहे। आज की कहानी में बस इतना ही।
- 19:54अगर आपके पास भी कोई कहानी है, कोई किस्सा है, तो आप उसे हमें
- 19:59जरूर भेजें। ईमेल आपकी स्क्रीन पर है।
- 20:03कहानियों के साथ अपना कॅाटाक्ट नंबर जरूर शेयर करें।
- 20:07अगर आप ये कहानी स्पॉटिफाइ पे सुन रहे हैं तो हमें फॉलो जरूर करें।
- 20:12और अगर आप ये कहानी यूट्यूब पर सुन रहे हैं तो चैनल को
- 20:16सब्सक्राइब करना ना भूले। हमारे चैनल पर ऐसी बहुत सारी
- 20:22हौंटेड चिल्स आपका इंतजार कर रही हैं।
- 20:25आज ये चैनल विजिट करें और इन कहानियों को अपना प्यार दे
- 20:29धन्यवाद, आप सुन रहे थे। दी हॉरर शो बाय कर्णिक।